कोलकाता किसान विश्व प्रसिद्ध हावड़ा ब्रिज से जुडी सभी बातें जानेंगे कोलकाता और हावड़ा के बीच उंगली नदी पर पहले कोई प्रेशर नहीं था नदी को पार करने के लिए नाव ही केवल एकमात्र सहारा था 1834 में हुगली नदी पर पीपे के पुल का निर्माण किया गया 1968 में हावड़ा स्टेशन के बनने के बाद धीरे-धीरे ट्रैफिक और लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी अंग्रेजों ने इस पर एक नया पुल बनाने की सूची पर वो चाह रहे थे कि ऐसा बोल बने जिससे जल मार्ग बिना रुके और पुष्प एक कोई गंभीर भी ना हो और साथ ही साथ लोगों को व्रत से आवाजाही में सुगमता रहे और यह केवल संभव था एक कैंटीलीवर पुल से अंग्रेजों ने तब एक फ्लोटिंग बीच बनाने का निर्णय लिया लेकिन तब तक पहला विश्वयुद्ध शुरू हो चुका था।
इस वजह से काम शुरू नहीं हो सका वर्ष सुननी बॉक्स में न्यू हावड़ा ब्रिज कमीशन का गठन किया गया पुल के निर्माण के लिए तत्कालीन बंगाल सरकार के द्वारा एक अधिनियम पारित किया गया जिसे हावड़ा पुल अधिनियम 1926 नाम दिया गया पहले इस पुल को बनाने की जिम्मेदारी जर्मनी की एक फर्म को दिया जाना था लेकिन बाद में ब्रिटेन और जर्मनी के रिश्ते में खटास आ गई लेकिन बाद में 1935 में इसका कॉन्ट्रैक्ट एक ब्रिटिश कंपनी क्लीवलैंड ब्रिज एंड इंजीनियरिंग कोल लिमिटेड को दिया गया पुलिस की संरचना ब्राथवेट बांज शॉप कंस्ट्रक्शन को लिमिटेड नामक कंपनी के द्वारा किया गया इस खूबसूरत हावड़ा ब्रिज का डिजाइन मैसेज रेंटल पावर और ट्राइटन के द्वारा दिया गया था इस ब्रिज का निर्माण वर्ष 1937 में प्रारंभ हुआ।
और यह पूर्ण रूप से 1942 में बनकर तैयार हुआ और अगले ही वर्ष 1945 में इस व्रत को आम लोगों के लिए खोल दिया गया हावड़ा ब्रिज पर गुजरने वाला पहला वह घंटे प्रॉब्लम था भारी ट्रैफिक के चलते 1993 में ट्रंप की आवाजाही बंद कर दिया गया द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने इस ब्रिज को नष्ट करने के लिए भारी बमबारी भी की थी लेकिन संयोग से इस वृक्ष को कोई नुकसान नहीं हुआ और इस कारण उनका कोई भी उद्घाटन समारोह नहीं किया गया जो 1965 में बंगाल साहित्य के महान कवि एशिया और भारत दोनों के ही प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के सम्मान में इस ब्रिज का नाम बदलकर रविंद्र शुरू कर दिया गया।
लेकिन आज भी एवरेज विश्व में हावड़ा ब्रिज के नाम से ही प्रसिद्ध है इस कैंटीलीवर पुल को बनने में 26500 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया इसमें से 23,500 टन स्टील की सप्लाई टाटा स्टील के द्वारा की गई थी पूरा ब्रिज नदी के दोनों किनारों पर बने दो सौ अस्सी फीट ऊंचे दो उपायों पर टिका है यह फूल 23 पूरा पेट यानी 725 मीटर लंबा है और 269 फीट ऊंचा है इसकी चौड़ाई 71 फीट है साथ ही दोनों तरफ मंदिर 15 फीट चौड़े 25 भी यह पूरा ब्रिज फाइट इन साइलेंट चीज का बना हुआ है ब्रिज इंजीनियरिंग का नायाब नमूना बन कर तैयार होने के बाद यह दुनिया में अपने तरह का तीसरा सबसे लंबा और यह अपने तरह विश्व का सबसे लंबा पुल उस समय संपूर्ण को बनने में लगभग 2.5 करोड़ रुपए खर्च हुआ था।
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के हावड़ा ब्रिज के देखभाल की जिम्मेदारी कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की है जिसकी स्थापना हावड़ा ब्रिज की स्थापना से भी 73 वर्ष पहले हुई थी आज के समय रोजाना लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा वाहन और 5 लाख से भी ज्यादा पैदल यात्री इस व्रत से गुजरते हैं हर समय इस ब्रिज पर लगभग नब्बे हजार टन का वजन होता है एक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि गुटखा तंबाकू आदि उसने की वजह से ब्रिज के पायों की मोटाई कम हो रही है और बाद में इसके पायो को नीचे फाइबर ग्लास ढूंढ पर लगभग 20 लाख रुपए का खर्च हुआ है कि विश्व प्रसिद्ध हावड़ा ब्रिज घूमने आए सैलानियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र होता है रात के समय भी इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है।