शादी को तीन साल हो चुके थे। आरव और सिया की ज़िंदगी अब रूटीन जैसी हो गई थी — दफ्तर, काम, मोबाइल, और फिर नींद।
कभी जो हर छोटी बात पर मुस्कुराते थे, अब बस “ठीक है” कहकर रह जाते थे। उस दिन शहर में अचानक तेज़ बारिश शुरू हो गई।
आरव ऑफिस से लौट रहा था, और सोचा — “आज सिया को लेकर कुछ अलग करते हैं।” घर के पास उसने फूलों की छोटी-सी दुकान से एक लाल गुलाब लिया। सालों बाद घर पहुँचा तो सिया बालकनी में बैठी थी, चाय का कप हाथ में, और हल्की बारिश को देख रही थी। आरव ने पीछे से आकर उसकी आँखों पर हाथ रख दिए। सिया मुस्कुराई — “इतने सालों बाद ये नखरे?” आरव बोला “थोड़ा रोमांस भी तो जरूरी है, मैडम।” और उसे वो गुलाब थमा दिया।
सिया ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराकर आरव का हाथ पकड़ लिया। दोनों चुपचाप बैठे रहे — बारिश की आवाज़, ठंडी हवा, और दिलों की खामोशी सब कुछ कह रही थी। आरव ने धीरे से कहा,
“हम बदल गए ना?”सिया ने सिर उसके कंधे पर रख दिया,
“नहीं, बस थोड़ा व्यस्त हो गए थे… लेकिन प्यार अब भी उतना ही है।”
तभी बिजली चमकी, बारिश और तेज़ हो गई।
आरव उठा — “चलो, भीगते हैं।”
सिया बोली — “पागल हो क्या?”
पर अगले ही पल दोनों बालकनी में खड़े होकर बारिश में भीग रहे थे, जैसे फिर से पहली बार मिले हों आरव ने फुसफुसाया — “अब तो लगता है, हम फिर से पुराने वाले बन गए हैं।” सिया ने मुस्कुराकर कहा “नहीं, अब पहले से भी ज़्यादा प्यार है।”