हिंदी ने म ना सौथ दक्षिणा अ अ देश भाष क तमिल हिंदी राद हिंदी राद अ ना अच मनसु टे आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम और जनसेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने तमिलनाडु के नेताओं पर बड़ा हमला बोला है उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर हिंदी भाषा से इतनी दिक्कत है तो फिर तमिल फिल्म इंडस्ट्री के लोग अपनी फिल्मों को हिंदी में डब करवाकर करोड़ों रुपए क्यों कमाते हैं पवन कल्याण का बयान ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु की टीम की सरकार और केंद्र सरकार के बीच हिंदी भाषा और नई शिक्षा नीति को लेकर तनाव बढ़ता हुआ नजर आ रहा है
डीएम के सरकार का आरोप है कि नई शिक्षा नीति के जरिए हिंदी को दक्षिण भारत पर थोपा जा रहा है पवन कल्याण के इस बयान से अब भवाल मचता हुआ नजर आ रहा है दरअसल जनसेना पार्टी के 11वें स्थापना दिवस पर बोलते हुए पवन कल्याण ने कहा कि भारत को तमिल समेत सभी भाषाओं की जरूरत है ना कि सिर्फ दो भाषाओं की उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ लोग संस्कृत का विरोध क्यों करते हैं और तमिलनाडु के नेता हिंदी के खिलाफ क्यों हैं जब वो खुद बॉलीवुड से पैसा कमाते हैं वैसे बीजेपी ने पवन कल्याण के बयान को सही ठहराया और टीएम के सरकार को आड़े हाथों लिया है
बीजेपी नेता रचना रेड्डी ने कहा कि तमिलनाडु के नेता अपने बच्चों को फ्रेंच और जर्मन जैसी विदेशी भाषाएं सिखाने के लिए तैयार हैं लेकिन हिंदी से परहेज करते हैं बीजेपी नेता विक्रम नथ धावा ने इस मुद्दे को राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए कहा कि हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है और इसे पूरे देश में बढ़ावा दिया जाना चाहिए लेकिन इसी कड़ी में दक्षिण भारत के दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज ने पवन कल्याण को को जवाब देते हुए कहा कि अपनी मातृभाषा को बचाने की बात करना नफरत फैलाना नहीं है उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए और यह हिंदी विरोध नहीं है
बल्कि अपनी संस्कृति को बचाने की लड़ाई है अब यह मुद्दा इतने बड़े लेवल पर क्यों आ गया इसके पीछे का रीजन भी हम आपको बताना चाहेंगे दरअसल नई शिक्षा नीति के तहत हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य किया जा सकता है जिसका तमिलनाडु सरकार विरोध कर रही है तमिलनाडु में पहले भी हिंदी विरोधी आंदोलन हुए और डीएम के जैसी पार्टियां हमेशा हिंदी के खिलाफ मुखर रही है बीजेपी और केंद्र सरकार का तर्क है कि हिंदी से राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी और यह भारत की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा भी है
और इसी विवाद के पीछे अब राजनीति भी गरमा हुई नजर आ रही है और पवन कल्याण की जनसेना पार्टी बीजेपी के सहयोगी भी रही है इसलिए उनके बयान को हिंदी भाषा को बढ़ावे देने की राजनीति से जुड़ा जा रहा है तमिलनाडु में हिंदी विरोध से डीएमके को चुनावी फायदा मिलता है क्योंकि वहां के लोग अपनी भाषा और संस्कृत को लेकर काफी संवेदनशील है बीजेपी दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है और हिंदी के मुद्दे को वहां के लोगों से जोड़कर अपने पक्ष में माहौल बना रही है ऐसे में आप भी समझ सकते हैं कि पवन कल्याण के इसी बयान से अब राजनीति गलियारे में भी हलचल देखने को मिल रही है।
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