विमान हादसे में आखिरी वक़्त तक जूझने वाले पायलट कैप्टन सुमित सबरवाल की ये दर्दनाक कहानी रुला देगी…

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अहमदाबाद के मेघानी नगर में हुआ वह विमान हादसा जिसने कई जिंदगियों को तबाह कर दिया और उनकी जिंदगियां बचाने में जुटे कैप्टन सुमित सब्रवाल भी पंचतत्व में विलीन हो गए जरा सोचिए वह मंजर जहां 88 साल के पिता ने अपने 60 साल के बेटे का अंतिम संस्कार किया माहौल गमगीन था और पिता अपने बेटे को कंधा भी ना दे सके बुजुर्ग पिता के सामने उनकी सारी जिंदगी तबाह हो गई कैप्टन सुमित सब्रवाल और उनके साथ उनके को पायलट यह जान चुके थे कि अब वह इस दुनिया में नहीं रहेंगे यह दो वो पहले शख्स थे जिन्हें मालूम था कि प्लेन क्रैश होगा और सब कुछ खत्म हो जाएगा

लेकिन फिर भी अपनी नहीं बल्कि उन यात्रियों की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया लेकिन काल ने सब कुछ अपने अंदर निगल कैप्टन सुमित सब्रवाल के बारे में उनके दोस्त कई बातें करते हैं एयर इंडिया के उनके सहकर्मी और उनके दोस्त उन्हें सेबी कहकर पुकारा करते थे सबरवाल अहमदाबाद से लंदन कैटिक जा रहे थे एयर इंडिया के विमान के पायलट थे 12 जून को दुर्घटनाग्रस्त वह विमान हो गया जिसमें 242 लोगों में से 241 लोगों की जान चली गई जमीन पर 29 लोगों की जान जाने की खबर है Air इंडिया के कैप्टन और सब्रवाल के सहयोगी कपिल कोहल ने अपने दोस्त को आंसुओं के साथ अंतिम विदाई दी उनका कहना है कि यह देखना मुश्किल था अपने ही दोस्त को अपने ही सहकर्मी को अपने सामने आग की लपटों के हवाले होना अपनी दबी हुई आवाज में कपिल कोहल कहते हैं कि मैं 35 सालों से उसे जानता था

वो मेरे सीनियर थे लेकिन मेरे दोस्त भी हम उन्हें नायक कहा करते थे कोहल कहते हैं कि उनकी सादगी देखने वाली थी उनके कपड़ों की बात करें तो केवल दो जोड़ी कपड़े और दो जोड़ी चप्पल जूते से वह खुश हो जाते थे इसके अलावा उनके कमरों में आपको कुछ नहीं मिलेगा उनके कंधों पर चार पट्टियां थी लेकिन स्वभाव फिर भी विनर्म मृदुभाषी हम सब उन्हें सेबी कहते थे वो अक्सर गंभीर रहते मजाक करते थे लेकिन WhatsApp पर कभी ज्यादा बात नहीं की लेकिन बात अगर हमारे परिवार और बच्चों की उपलब्धियों की होती तो वह हमेशा विचार विमर्श करते और सबकी परवाह करते यह कहना था कपिल कोहल का जो उनके सहकर्मी थे उनके एक दूसरे सहकर्मी शंकर चौधरी ने भी कैप्टन सबरवाल की मुस्कान के बारे में बात की बहुत याद आती है उनके मुस्कान की यह कहना था शंकर चौधरी का वो कहते हैं कि लंबी दूरी की उड़ान के बाद भी वह हमेशा उसी गर्मजशी और मुस्कान के साथ हमारा स्वागत किया करते थे जैसे खुशमजाजी इंसान जो कभी भी ना थकता हो

अब जब भी मैं विमान के नीचे गिरने की अंतिम तस्वीर देखता हूं तो अंदर से टूट जाता हूं मैं सोचता हूं कि अगर मैं उसकी जगह होता तो क्या करता उनके दोस्त कोहल कहते हैं कि मैंने घटना के बाद दो दिन बाद ही उड़ान भरी यात्रियों ग्राउंड स्टाफ डिस्पैच सभी का मनोबल टूटा हुआ था उन्होंने कहा कि एटीसी पर भी आप इसे उनकी आवाज में सुन सकते हैं कैसे सभी इस घटना से पूरी तरीके से हिल चुके हैं टूट चुके हैं लेकिन फिर भी आगे बढ़ने की सभी में एक नई उम्मीद है वह कहते हैं कि इस घटना की जांच हो रही है और अब यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्टडी भी की जा रही

हम फिर उठेंगे फिर उड़ान भरेंगे और सबसे बढ़कर हम आपको सुरक्षित रखेंगे यह कहना उनके दोस्त कैप्टन कोहल का है जो खुद पायलट हैं और अपने यात्रियों को खास संदेश दे रहे हैं कैप्टन सुमित सब्रवाल की जिंदगी कुछ यूं दर्दनाक रही कि सबसे पहले उन्हें इस बात की जानकारी हुई कि वह अब इस दुनिया में नहीं रहेंगे लेकिन फिर भी उन्होंने जंग लड़ी अपनी जान जाते अपने सामने देखते हुए वह कुछ ना कर सके उन्होंने अपने पिता को वादा किया था कि चंद दिनों बाद रिटायरमेंट के बाद वो पूरा वक्त अपने पिता के साथ बिताएंगे लेकिन अब पीछे अपने 88 साल के बुजुर्ग पिता को छोड़ गए हैं जिनकी देखभाल कौन करेगा इसके बारे में किसी के पास जवाब 

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